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Rajat Sharma's Blog | नितिन की नवीन टीम: चुनावों पर नजर

 Written By: Rajat Sharma
 Published : Aug 18, 2026 06:13 pm IST,  Updated : Aug 18, 2026 06:15 pm IST

नितिन नवीन की नई टीम में पुराने अनुभवी नेताओं और युवाओं, दोनों को शामिल किया गया है। नई टीम आने वाले तीन साल में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

बीजेपी अध्यक्ष बनने के सात महीने बाद नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान हुआ। ये टीम उतनी नवीन नहीं है जितने वो नवीन हैं। इस टीम में पुराने अनुभवी नेताओं और युवाओं, दोनों को शामिल किया गया है। पुराने नेताओं में सबसे बड़ा नाम वसुंधरा राजे सिंधिया का है जो दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। वसुंधरा राजे चुनाव लड़ने-लड़ाने में माहिर हैं। दूसरा बड़ा नाम केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का है। गोयल भी चुनावी रणनीति के अनुभवी खिलाड़ी हैं। उन्हें 12 साल बाद एक बार फिर कोषाध्यक्ष बनाया गया है। किसी भी पार्टी में चुनाव के दौरान कोषाध्यक्ष की भूमिका बहुत अहम होती है। नई टीम आने वाले तीन साल में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। दूसरा संकेत है, राज्यों में चुनाव जिताने वाले सुनील बंसल, विप्लव देब और विनोद तावड़े जैसे नेताओं को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी। तीसरा संकेत है, सोशल मीडिया को पूरी तरह से revamp करके नए ज़माने के लोगों को जिम्मेदारी देना। आज कल चुनावी जंग शुरू होने से पहले सोशल मीडियी पर युद्ध शुरू हो जाता है। बीजेपी इस लड़ाई में पिछड़ने लगी थी। कांग्रेस से आए अनिल एंटनी, रोहण गुप्ता, मनप्रीत सिंह बादल और आम आदमी पार्टी से आए संदीप पाठक को संगठन में पद देने का मतलब है कि दूसरी पार्टी से आए लोगों के लिए संगठन के दरवाजे अब बंद नहीं रहते। एक और खास बात ये है कि पहले के मुकाबले युवा नेताओं और महिलाओं को पार्टी के संगठन में ज्यादा जिम्मेदारियां दी गईं हैं। पिछले 12 साल से नरेंद्र मोदी की सरकार का फोकस महिलाओं और युवाओं पर रहा है। अब इसका reflection पार्टी संगठन में भी दिखाई दे रहा है।

दिमागी नक्सली: हम उन्हें शहरों को जंगल नहीं बनाने देंगे

कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिंदबरम ने कहा है कि उन्हें दिमागी नक्सल होने पर गर्व है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती, दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी खुद को दिमागी नक्सल बताया है। अब विपक्ष के तमाम नेता 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल तमगे की तरह कर रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से कहा था कि कुछ दिमागी नक्सल देश को अराजकता की आग में धकेलने की कोशिश कर रहे हैं, वो मौके की तलाश में हैं। इन दिमागी नक्सलों से सावधान रहने की जरूरत है। 

जंगल वाले नक्सल और शहर वाले नक्सल में फर्क होता है। जंगल वाला नक्सल बम, बंदूक से अराजकता फैलाता है और शहर वाला नक्सल modern tools का इस्तेमाल करके दिमाग से दंगा फैलाता है। जंगल वाला नक्सली ballot के बजाए बंदूक से सरकारें बदलने की कोशिश में लगा रहा, सफल नहीं हो पाया। अब दिमागी नक्सली EVM की बजाए सड़कों पर दंगा फसाद कराकर सरकार बदलने का सपना देखते हैं। दिमागी नक्सली मतभेद के नाम पर दूसरों को अपमानित करने का लाइसेंस समझते हैं। वो संविधान का नाम लेकर संसद, न्यायपालिका, चुनाव आयोग, मीडिया जैसी हर संस्था को बदनाम करने में दिमाग लगाते हैं। असल में ऐसे लोग किसी का सम्मान नहीं करते। हर उस व्यक्ति को जिसे समाज हीरो मानता है, उसकी छवि धूमिल करने में ये जान लगा देते हैं। ऐसे लोग हर पार्टी में घुस गए हैं। ऐसे लोगों पर हर राजनीतिक दल को नज़र रखनी चाहिए। हम दिमागी नक्सलों को इस बात की इजाज़त नहीं दे सकते कि वो किसी शहर को जंगल में तब्दील कर दे।

वंदे मातरम् ने सोनिया गांधी को बेचैन क्यों कर दिया?

स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम के अपमान के मुद्दे पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली, भुवनेश्वर, मंगलुरू, और मुंबई में पुलिस से सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत की गई है। दोनों के खिलाफ नए कानून के मुताबिक, राष्ट्रगीत के अपमान का केस दर्ज करने की मांग की गई है। अब पुलिस इन शिकायतों की जांच कर रही है। 15 अगस्त को कांग्रेस दफ्तर में स्वतंत्रता दिवस पर वंदे मातरम् गाया जा रहा था। इस दौरान सोनिया गांधी आस-पास खड़े लोगों को कुछ इशारे करती दिखीं। आरोप है कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् को बीच में रोकने की कोशिश की। राहुल गांधी भी इस दौरान कुछ कहते हुए देखे गए। इसके वीडियो सामने आए तो बीजेपी नेताओं ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर वार किया। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् के अपमान के लिए सोनिया गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि सोनिया गांधी के बगल में मल्लिकार्जुन खरगे खड़े थे। खरगे की उम्र ज्यादा है, उन्हें इतनी देर तक खड़े होने में मुश्किल हो रही थी, इसलिए सोनिया गांधी खरगे के लिए कुर्सी लाने को कह रही थी। इसका वंदे मातरम् के अपमान से कोई लेना-देना नहीं है। 

पिछले हफ्ते गांधी परिवार ने दो बड़ी गलतियां कीं। पहली, राहुल गांधी ने स्टेज पर कॉमेडी की। मोदी के विदेशी नेताओं से गले मिलने का मज़ाक उड़ाया। इसमें इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को भी लपेट लिया। ऐसी हरकतों का damage control कोई PR agency नहीं कर सकती। दूसरी गलती सोनिया गांधी ने की, जब वंदे मातरम् का चौथा छंद गाया जाने लगा, मां दुर्गा का नाम आया, तो उन्होंने अचानक आपा खो दिया। कैमरों के सामने सोनिया गांधी का वंदे मातरम् को रोकने का इशारा करना, कांग्रेस अध्यक्ष को टोकना, उनकी बनी बनाई छवि को damage कर गया। और फिर जिस तरह से जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने इस पर पर्दा डालने की कोशिश की उसने तो और भी कबाड़ा कर दिया। किसी ने कहा कि सोनिया जी खरगे के लिए कुर्सी मांग रही थीं। किसी ने रविंद्रनाथ टैगोर का नाम लेकर कहा कि कांग्रेस को राष्ट्रगीत के दो छंद ही गाने हैं। लेकिन कहने वाले भी जानते हैं कि ये सब बहानेबाजी है। मुझे इसलिए आश्चर्य हुआ कि सरकार में रहते हुए और सरकार के बाहर सोनिया गांधी ने कभी शालीनता नहीं खोई। वंदे मातरम् ने उन्हें इतना बेचैन क्यों कर दिया? ये समझना मुश्किल है।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 17 अगस्त, 2026 का पूरा एपिसोड

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